Thursday, February 20, 2014

सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा

सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा

मेरी धरती मुझ से पूछ रही
कब मेरा क़र्ज़ चुकाओगे
मेरा अम्बर मुझ से पूछ रहा
कब अपना धर्म निभाओगे
मैंने वचन दिया भारत मां को
तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा

वो लूट रहे हैं सपनो को
मैं चैन से कैसे सो जाऊं
वो बेच रहे हैं भारत को
खामोश मैं कैसे हो जाऊं
हाँ मैंने कसम उठाई है
हाँ मैंने कसम उठाई है

मैं देश नहीं बिकने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा

वो जितने अँधेरे लायेंगे
मैं उतने उजाले लाऊँगा
वो जितनी रात बढाएंगे
मैं उतने सूरज उगाऊँगा
इस छल फरेब की आंधी में
मैं दीप नहीं बुझने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा

वो चाहते हैं जागे न कोई
बस रात का कारोबार चले
वो नशा बांटते जायें
और देश यूँही बीमार चले
पर जाग रहा है देश मेरा
पर जाग रहा है देश मेरा

हर भारतवासी जीतेगा
मैं देश नहीं रुकने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा

(अतरिक्त)

अब घड़ी फैसले की आयी
हमने है कसम अब खाई
हमें फिरसे दोहराना है
और खुद को याद दिलाना है
न भटकेंगे न अटकेंगे
कुछ भी हो इस बार
हम देश नहीं मिटने देंगे

माओं बहनों किस्मत पर
गिद्ध नज़र लगाये बैठे हैं
हर इन्सान है यहाँ डरा डरा
दिल में खौफ़ जमाये बैठे हैं
मैं अपने देश की धरती पर
अब दर्द नहीं उगने दूंगा
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा
 - अटल बिहारी वाजपेयी