Saturday, October 2, 2010

जैसे बीज अपना अस्तित्व मिटा कर वृक्ष बन कर एक से अनेक हो जाता है, उसी प्रकार वह प्राणी जो सब प्राणियों के हित में अपने को मिटा देता है तो वह अनंत शक्ति सम्पन्न हो जाता है|
(स्वामी भजनानंद)

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