Thursday, April 21, 2011

JAI JAI BHARAT: मझधार जीवन है ..,

JAI JAI BHARAT: मझधार जीवन है ..,: "- अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान | एक कविता किनारा वह नीरस है .., जो सारी हलचल देख कर भी कुछ नहीं कर पाया..! ठगा सा देखता रहता है..."

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