Wednesday, December 12, 2012

हमारे संविधान में 1969 के Act की धारा "49-O" में एक प्रावधान है, जिसके अनुसार एक व्यक्ति मतदान बूथ पर जाकर अपनी पहचान की पुष्टि तथा अपनी उंगली चिह्नित करने के बाद पीठासीन अधिकारी को बता सकता है कि वह किसी भी candidate को वोट नहीं देना चाहता है. ऐसी सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इस सुविधा को इन चतुर चालाक नेताओं ने कभी भी नहीं बताया है. इसे "49-O" कहा जाता है. हमें क्यों ये कहना चाहिये कि मैं किसी को भी 
वोट नहीं देना चाहता हूँ? क्योंकि, एक वार्ड में, अगर एक उम्मीदवार 100 मतों से जीतता है, और उस वार्ड को 49-O वोट इन 100 मतों से अधिक मिलते हैं, तो, मतदान रद्दकर दिया जायेगा और दोबारा मतदान होगा. इतना ही नहीं, उन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को समाप्त कर दिया जायेगा और वे फिर से चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि लोगों ने पहले ही उन पर अपना निर्णय व्यक्त कर दिया है.यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है कि निर्वाचन आयोग ने अभी तक इस सुविधा को सार्वजनिक नहीं किया है.

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