Tuesday, September 6, 2011

सिस्टम पर कुछ गंभीर सवाल


उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में वकीलों और लेखपालों (रेवेन्यू क्लर्क) के संघर्ष में दो वकीलों की मौत की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसने हमारे सिस्टम को लेकर कुछ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज आम आदमी में सिस्टम के प्रति बढ़ रहे अविश्वास की सबसे बड़ी वजह यह है कि उसे व्यवस्था की पहली सीढ़ी पर ही घोर अराजकता का सामना करना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन हो या लोअर जुडिशरी, हर जगह ऐसा ही माहौल कायम हो गया है।
लखीमपुर खीरी की मोहम्मदी तहसील में वकीलों और लेखपालों की लड़ाई किसी व्यापक मुद्दे पर नहीं बल्कि अपने निजी हितों के लिए ही है। उनका टकराव इतना बढ़ा कि खूनी संघर्ष में बदल गया। उन्हें अपनी जिम्मेदारी का जरा भी अहसास नहीं रहा। वे इस बात से भी बेखबर रहे कि उनके इस आचरण का आम आदमी में क्या संदेश जाएगा। अगर कामकाज को लेकर दोनों पक्षों में कोई समस्या थी तो उसे बातचीत से सुलझाया जा सकता था। इसे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने लाया जा सकता था लेकिन ऐसा करने की बजाय इसे अपने तरीके से निपटाने की कोशिश की गई क्योंकि उनके स्वार्थ टकरा रहे थे। इस तरह की समस्याएं व्यवस्थागत अड़चनों से भी आती हैं।
कई पुराने कायदे अब भी चले आ रहे हैं, जिन्हें बदले जाने की जरूरत है। लखीमपुर खीरी के वकील कह रहे हैं कि प्रमाणपत्र जारी करने में लेखपाल मनमाने तरीके से वसूली कर रहे हैं। जबकि लेखपालों का कहना है कि उनके ऊपर जाति या आय प्रमाणपत्र जारी करने का बहुत ज्यादा दबाव रहता है। उन पर वकील और दूसरे लोग अपने मनमुताबिक सर्टिफिकेट बनवाने का प्रेशर डालते रहते हैं। सरकार ने इनके लिए कोई निश्चित मानदंड तय नहीं किया है जिससे समस्याएं पैदा हो रही हैं।
इस एक घटना से समझा जा सकता है कि करप्शन का मामला कितना जटिल है। देश की बहुसंख्य जनता को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर मौजूद तंत्र से तकरीबन रोज ही जूझना पड़ता है लेकिन यह तंत्र बेहद संवेदनहीन और स्वार्थी हो चुका है, जो जनता को एक दुधारू गाय की तरह देखता है। इन स्तरों पर तमाम नियम-कानून अपना एक अलग ही रंग ले लेते हैं। इस तंत्र को जिम्मेदार बनाने की जरूरत है लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक नेतृत्व इसे बदलने में रुचि नहीं लेता। भ्रष्टाचार मिटाने की बड़ी-बड़ी बातों और नारों से काम नहीं चलेगा। छोटे लेवल पर ठोस कदम उठाने की कहीं ज्यादा जरूरत है। लखीमपुर खीरी की घटना के दोषियों को सख्त सजा मिले और विभिन्न स्तरों पर कामकाज की गड़बड़ियों को दूर किया जाए।

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