पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की बढ़तीघटनाओं पर विमिन एक्टिविस्ट डॉ . रक्षंदा परवीन नेडेली टाइम्स में प्रकाशित अपने लेख में गहरी चिंता जताईहै। वह लिखती हैं कि देश में महिलाओं के खिलाफअत्याचारों की जैसे बाढ़ आ गई है। देश के अनेक प्रांतों मेंइन घटनाओं की बढ़ोतरी से साबित होता है कि प्रांतीयसरकारें और राष्ट्रीय विधायी संस्थाएं ऐसे मामलों कीरोकथाम करने और दोषियों की धरपकड़ करने में बिल्कुलनाकाम साबित हो रही हैं। रक्षंदा ने हैरानी जताते हुएलिखा है कि अगर बलूचिस्तान के एक मामले को नजीरमाना जाए तो वहां के कुछ पुरुष विधायकों ने परंपरा केनाम पर 2008 में एक महिला को जिंदा जलाने को सहीठहराया था। यही नहीं , इस मामले की निंदा करते हुएजब सिंध की प्रांतीय असेंबली ने एक कड़ा प्रस्ताव रखा ,तो उस पर ज्यादातर विधायक खामोश रहे थे। पाकिस्तान के बारे में एक बड़ा सच यह है कि आज भी ज्यादातरगरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े समाजों में महिलाओं और लड़कियों पर होने वाले अत्याचार की सुध नहीं लीजाती है। अगर दर्ज मामलों की ही बात की जाए तो देश में पिछले तीन साल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के24,119 मामले हुए हैं। इसी से अंदाजा लग जाता है कि पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति कितनी दयनीय है।इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या एक इस्लामी राष्ट्र में महिलाओं को न्याय और समानअधिकार दिलाने का काम पूरी निष्पक्षता से हो सकता है ? या फिर महिलाओं के अत्याचार के खिलाफ यहां उठीआवाजें सिर्फ कुछ आकर्षक नारों तक ही सीमित रह जाएंगी।
Monday, September 12, 2011
महिलाओं पर अत्याचार
पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की बढ़तीघटनाओं पर विमिन एक्टिविस्ट डॉ . रक्षंदा परवीन नेडेली टाइम्स में प्रकाशित अपने लेख में गहरी चिंता जताईहै। वह लिखती हैं कि देश में महिलाओं के खिलाफअत्याचारों की जैसे बाढ़ आ गई है। देश के अनेक प्रांतों मेंइन घटनाओं की बढ़ोतरी से साबित होता है कि प्रांतीयसरकारें और राष्ट्रीय विधायी संस्थाएं ऐसे मामलों कीरोकथाम करने और दोषियों की धरपकड़ करने में बिल्कुलनाकाम साबित हो रही हैं। रक्षंदा ने हैरानी जताते हुएलिखा है कि अगर बलूचिस्तान के एक मामले को नजीरमाना जाए तो वहां के कुछ पुरुष विधायकों ने परंपरा केनाम पर 2008 में एक महिला को जिंदा जलाने को सहीठहराया था। यही नहीं , इस मामले की निंदा करते हुएजब सिंध की प्रांतीय असेंबली ने एक कड़ा प्रस्ताव रखा ,तो उस पर ज्यादातर विधायक खामोश रहे थे। पाकिस्तान के बारे में एक बड़ा सच यह है कि आज भी ज्यादातरगरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े समाजों में महिलाओं और लड़कियों पर होने वाले अत्याचार की सुध नहीं लीजाती है। अगर दर्ज मामलों की ही बात की जाए तो देश में पिछले तीन साल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के24,119 मामले हुए हैं। इसी से अंदाजा लग जाता है कि पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति कितनी दयनीय है।इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या एक इस्लामी राष्ट्र में महिलाओं को न्याय और समानअधिकार दिलाने का काम पूरी निष्पक्षता से हो सकता है ? या फिर महिलाओं के अत्याचार के खिलाफ यहां उठीआवाजें सिर्फ कुछ आकर्षक नारों तक ही सीमित रह जाएंगी।
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